डाटा इन्ट्री ऑपरेटर - कम्प्यूटर ऑपरेटर
Saturday, February 28, 2026
बिहार सरकार, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग का आदेश सं0-562 दिनांक-27-02-2026
Friday, January 30, 2026
बिहार सरकार, योजना एवं विकास विभाग (विकास आयुक्त का कार्यालय) का पत्रांक-38 दिनांक-28-01-2026
बिहार सरकार, योजना एवं विकास विभाग (विकास आयुक्त का कार्यालय) का पत्रांक-38
दिनांक-28-01-2026
बेल्ट्रॉन के माध्यम से संविदा पर कार्यरत ग्रेड-2 डाटा इन्ट्री ऑपरेटर को सूचना प्रावैधिकी विभाग, बिहार, पटना के संकल्प सं0-965 दिनांक-28-01-2026 के आलोक में ग्रेड-2 से ग्रेड में उत्क्रमण के सम्बन्ध में।
Monday, December 29, 2025
बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी (सामान्य प्रशासन विभाग) का पत्र सं0-3090 दिनांक-26-12-2025
बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी (सामान्य प्रशासन विभाग) का पत्र सं0-3090 दिनांक-26-12-2025
दिनांक-10-12-2025 को बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी की शासी परिषद की ३७वीं बैठक की कार्यावली बिन्दु-४ में स्वीकृत निर्णय के आलोक में बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी के अंतर्गत संविदा के आधार पर नियोजित कर्मियों यथा आई0टी0 प्रबंधक, आई0 टी0 सहायक तथा कार्यपालक सहायक के मानदेय का निर्धारण/पुननिर्धारण के प्रस्ताव को दृष्टिपथ में रखकर बेल्ट्रॉन के प्रोग्रामर तथा डाटा इन्ट्री ऑपरेटर के मानदेय में दृष्टिगोचर कतिपय असमानताओं के समाधान करने हेतु समिति का गठन।
Tuesday, December 16, 2025
मुख्य सचिव, बिहार-सह-अध्यक्ष शासी परिषद की अध्यक्षता में बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाईटी के शासी परिषद की 37वीं बैठक की कार्यवाही
मुख्य सचिव, बिहार-सह-अध्यक्ष शासी परिषद की अध्यक्षता में बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाईटी के शासी परिषद की 37वीं बैठक की कार्यवाही
Sunday, December 7, 2025
बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन लि0 का पत्रांक -MP-549/25 दिनांक-01-12-2025
बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन लि0 का पत्रांक -MP-549/25 दिनांक-01-12-2025
299 अभ्यर्थीगण के ऑनलाईन के0वाई0सी0 प्रक्रिया पूर्ण करने के संबंध में।
Friday, October 31, 2025
समाहरणालय, जहानाबाद का पत्र सं0-619 दिनांक-25-10-2025
समाहरणालय, जहानाबाद का पत्र सं0-619 दिनांक-25-10-2025
जिला नीलाम शाखा, जहानाबाद में बेल्ट्रॉन के माध्यम से कार्यरत कुल- 53 डाटा इन्ट्री ऑपरेटरों की सेवा वापसी के साथ प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में।
बिहार विधान सभा सचिवालय का पत्र सं0-3096 दिनांक-30-10-2025
बिहार विधान सभा सचिवालय का पत्र सं0-3096 दिनांक-30-10-2025
संविदा के आधार पर कार्यरत 27 (सताईस) डाटा इन्ट्री ऑपरेटरों की सेवा वापस करने के संबंध में।
Thursday, October 16, 2025
बिहार सरकार, विधि विभाग का पत्र सं0-3091 दिनांक- 13-05-2024
पारस्परिक स्थानांतरण हेतु अनापति/सहमति के संबंध में।
बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन लि0 का पत्रांक-MP-591/23 दिनांक-17-08-2023
बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन लि0 का पत्रांक-MP-591/23 दिनांक-17-08-2023
अधीक्षक मद्यनिषेध कार्यालय, पालीगंज में श्री अविनाश कुमार, इम्प्लाई आई०डी०-201901333599 एवं नगर परिषद् कार्यालय, भभुआ, कैमूर में श्री रोहित कुमार, इम्प्लाई डी०-201901350437, डाटा इन्ट्री ऑपरेटरों से प्राप्त अभ्यावेदन एवं अवर सचिव, मद्य निषेध, पद एवं निबंधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-4118 दिनांक-03.08.2023 एवं अपर सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-3310 दिनांक-25.07.2023 द्वारा प्राप्त सहमति पत्र के आलोक में कार्यहित में पूर्व की सेवा शर्त के अनुरूप निम्नरूपेण पारस्परिक प्रतिनियुक्त किया जाता है:-
Tuesday, October 14, 2025
कर्मचारियों के नियमितीकरण पर बचने की कोशिश न करें सरकारें- हाईकोर्ट
कर्मचारियों के नियमितीकरण पर बचने की कोशिश न करें सरकारेंः हाई कोर्ट
वर्षों तक नियमित कार्य करवाने पर भी अस्थायी दर्जे में रखना असंवैधानिक
लंबे समय से सेवाएं दे रहे अस्थायी, दैनिक वेतनभोगी व अनुबंधित कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर याचिकाओं पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब व हरियाणा सरकार को आड़े हाथों लिया है। कहा कि सरकारें इस मामले में संवैधानिक अदालतों के फैसलों से बचने की नीति अपना रही हैं।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने इस रवैये को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि - यह न केवल कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन है, बल्कि समानता व गरिमा के सिद्धांतों की - भी अनदेखी है। दोनों राज्य बार बार ऐसी नीतियां - बनाते हैं, जिनका उद्देश्य अदालतों के आदेशों को लागू करने से बचना होता है। यह देखा जा रहा - है कि नियमितीकरण के दावों को न तो स्वीकार किया जाता है व न ही अस्वीकार, जिससे कर्मचारी वर्षों तक अनिश्चितता की स्थिति में रहते हैं। कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग - के बारे में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते - हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि अस्थायी या ठेका
कर्मचारियों से वर्षों तक नियमित कार्य करवाय और फिर भी उन्हें अस्थायी दर्जे में रखना असंवैधानिक है और यह राज्य के एक आदश नियोक्ता होने के सिद्धांत के विपरीत है। हाई कोट ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संकट, स्वीकृत पद की कमी, योग्यता की अनुपलब्धता या सर्वोच्च न्यायालय के पुराने निर्णयों का हवाला देकन नियमितीकरण से बचना न्यायोचित नहीं ठहराय जा सकता। राज्य और उसके अधीन संस्थान कर्मचारियों का शोषण नहीं कर सकते और उन्हें स्थायी लाभों से वंचित नहीं रख सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि अस्थायी करण कर्मचारियों के जीवन व सामाजिक सुरक्षा के अधिकार पर गहर प्रभाव डालता है। लंबे समय तक अस्थायी स्थिति में रखे जाने से उनकी पेशेवर स्थिरता, पारिवारिक जीवन और आत्मसम्मान प्रभावित होता है हाई कोर्ट ने दोनों राज्यों को चेतावनी दी कि वे भविष्य में ऐसी नीतियां न बनाएं जिनसे कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हो या कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार जारी रहे। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि कर्मचारियों के दावे तय समय सीमा में निपटाए जाएं ताकि उन्हें न्याय मिल सके


