Friday, January 30, 2026

बिहार सरकार, योजना एवं विकास विभाग (विकास आयुक्‍त का कार्यालय) का पत्रांक-38 दिनांक-28-01-2026


 बिहार सरकार, योजना एवं विकास विभाग (विकास आयुक्‍त का कार्यालय) का पत्रांक-38   

दिनांक-28-01-2026

बेल्‍ट्रॉन के माध्‍यम से संविदा पर कार्यरत ग्रेड-2 डाटा इन्‍ट्री ऑपरेटर को सूचना प्रावैधिकी विभाग, बिहार, पटना के संकल्‍प सं0-965 दिनांक-28-01-2026  के आलोक में ग्रेड-2  से ग्रेड  में उत्‍क्रमण के सम्‍बन्‍ध में।






Monday, December 29, 2025

बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी (सामान्‍य प्रशासन विभाग) का पत्र सं0-3090 दिनांक-26-12-2025

 


बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी (सामान्‍य प्रशासन विभाग) का पत्र सं0-3090 दिनांक-26-12-2025

दिनांक-10-12-2025 को बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी की शासी परिषद की ३७वीं बैठक की कार्यावली बिन्‍दु-४ में स्‍वीकृत निर्णय के आलोक में बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी के अंतर्गत संविदा के आधार पर नियोजित कर्मियों यथा आई0टी0 प्रबंधक, आई0 टी0 सहायक तथा कार्यपालक सहायक के मानदेय का निर्धारण/पुननिर्धारण के प्रस्‍ताव को दृष्टिपथ में रखकर बेल्‍ट्रॉन के प्रोग्रामर तथा डाटा इन्‍ट्री ऑपरेटर के मानदेय में दृष्टिगोचर कतिपय असमानताओं के समाधान करने हेतु समिति का गठन। 




Tuesday, December 16, 2025

मुख्‍य सचिव, बिहार-सह-अध्‍यक्ष शासी परिषद की अध्‍यक्षता में बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाईटी के शासी परिषद की 37वीं बैठक की कार्यवाही

 मुख्‍य सचिव, बिहार-सह-अध्‍यक्ष शासी परिषद की अध्‍यक्षता में बिहार प्रशासनिक सुधार  मिशन सोसाईटी के शासी परिषद की  37वीं बैठक की कार्यवाही



Sunday, December 7, 2025

बिहार स्‍टेट इलेक्‍ट्रॉनिक डेवलपमेन्‍ट कॉरपोरेशन लि0 का पत्रांक -MP-549/25 दिनांक-01-12-2025

 बिहार स्‍टेट इलेक्‍ट्रॉनिक डेवलपमेन्‍ट कॉरपोरेशन लि0 का पत्रांक -MP-549/25   दिनांक-01-12-2025


299 अभ्‍यर्थीगण के ऑनलाईन के0वाई0सी0 प्रक्रिया पूर्ण करने के संबंध में। 



Friday, October 31, 2025

समाहरणालय, जहानाबाद का पत्र सं0-619 दिनांक-25-10-2025

 समाहरणालय, जहानाबाद का पत्र सं0-619  दिनांक-25-10-2025

जिला नीलाम शाखा, जहानाबाद में बेल्‍ट्रॉन के माध्‍यम से कार्यरत कुल- 53 डाटा इन्‍ट्री ऑपरेटरों की सेवा वापसी के साथ प्रमाण-पत्र उपलब्‍ध कराने के संबंध में। 



बिहार विधान सभा सचिवालय का पत्र सं0-3096 दिनांक-30-10-2025

 बिहार विधान सभा सचिवालय का पत्र सं0-3096 दिनांक-30-10-2025

संविदा के आधार पर कार्यरत 27 (सताईस) डाटा इन्‍ट्री ऑपरेटरों की सेवा वापस करने के संबंध में। 



Thursday, October 16, 2025

बिहार सरकार, विधि विभाग का पत्र सं0-3091 दिनांक- 13-05-2024

 

पारस्‍परिक स्‍थानांतरण हेतु अनापति/सहमति के संबंध में।




बिहार स्‍टेट इलेक्‍ट्रॉनिक डेवलपमेन्‍ट कॉरपोरेशन लि0 का पत्रांक-MP-591/23 दिनांक-17-08-2023

 

बिहार स्‍टेट इलेक्‍ट्रॉनिक डेवलपमेन्‍ट कॉरपोरेशन लि0 का पत्रांक-MP-591/23   दिनांक-17-08-2023

अधीक्षक मद्यनिषेध कार्यालय, पालीगंज में श्री अविनाश कुमार, इम्प्लाई आई०डी०-201901333599 एवं नगर परिषद् कार्यालय, भभुआ, कैमूर में श्री रोहित कुमार, इम्प्लाई डी०-201901350437, डाटा इन्ट्री ऑपरेटरों से प्राप्त अभ्यावेदन एवं अवर सचिव, मद्य निषेध, पद एवं निबंधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-4118 दिनांक-03.08.2023 एवं अपर सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-3310 दिनांक-25.07.2023 द्वारा प्राप्त सहमति पत्र के आलोक में कार्यहित में पूर्व की सेवा शर्त के अनुरूप निम्नरूपेण पारस्परिक प्रतिनियुक्‍त किया जाता है:-






Tuesday, October 14, 2025

कर्मचारियों के नियमितीकरण पर बचने की कोशिश न करें सरकारें- हाईकोर्ट

 

कर्मचारियों के नियमितीकरण पर बचने की कोशिश न करें सरकारेंः हाई कोर्ट

वर्षों तक नियमित कार्य करवाने पर भी अस्थायी दर्जे में रखना असंवैधानिक


लंबे समय से सेवाएं दे रहे अस्थायी, दैनिक वेतनभोगी व अनुबंधित कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर याचिकाओं पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब व हरियाणा सरकार को आड़े हाथों लिया है। कहा कि सरकारें इस मामले में संवैधानिक अदालतों के फैसलों से बचने की नीति अपना रही हैं।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने  इस रवैये को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि - यह न केवल कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन है, बल्कि समानता व गरिमा के सिद्धांतों की - भी अनदेखी है। दोनों राज्य बार बार ऐसी नीतियां - बनाते हैं, जिनका उद्देश्य अदालतों के आदेशों को लागू करने से बचना होता है। यह देखा जा रहा - है कि नियमितीकरण के दावों को न तो स्वीकार किया जाता है व न ही अस्वीकार, जिससे कर्मचारी वर्षों तक अनिश्चितता की स्थिति में  रहते हैं। कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग - के बारे में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते - हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि अस्थायी या ठेका

कर्मचारियों से वर्षों तक नियमित कार्य करवाय और फिर भी उन्हें अस्थायी दर्जे में रखना असंवैधानिक है और यह राज्य के एक आदश नियोक्ता होने के सिद्धांत के विपरीत है। हाई कोट ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संकट, स्वीकृत पद की कमी, योग्यता की अनुपलब्धता या सर्वोच्च न्यायालय के पुराने निर्णयों का हवाला देकन नियमितीकरण से बचना न्यायोचित नहीं ठहराय जा सकता। राज्य और उसके अधीन संस्थान कर्मचारियों का शोषण नहीं कर सकते और उन्हें स्थायी लाभों से वंचित नहीं रख सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि अस्थायी करण कर्मचारियों के जीवन व सामाजिक सुरक्षा के अधिकार पर गहर प्रभाव डालता है। लंबे समय तक अस्थायी स्थिति में रखे जाने से उनकी पेशेवर स्थिरता, पारिवारिक जीवन और आत्मसम्मान प्रभावित होता है हाई कोर्ट ने दोनों राज्यों को चेतावनी दी कि वे भविष्य में ऐसी नीतियां न बनाएं जिनसे कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हो या कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार जारी रहे। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि कर्मचारियों के दावे तय समय सीमा में निपटाए जाएं ताकि उन्हें न्याय मिल सके




Monday, October 13, 2025

ई0पी0एफ0ओ ने न्‍यूनतम कार्यकाल की सीमा घटाई, न्‍यासी बोर्ड ने कई अन्‍य बड़े फैसले लिए

 

ई0पी0एफ0ओ ने न्‍यूनतम कार्यकाल की सीमा घटाई, न्‍यासी बोर्ड ने कई अन्‍य बड़े फैसले लिए

बदलाव - 12  माह की सेवा अवधि में ही पीएफ राशि निकाल सकेंगे। 


नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। 

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की केंद्रीय न्यासी बोर्ड बैठक में कर्मचारियों को राहत देने वाले कई अहम फैसले लिए गए। अब पीएफ खाते से सभी तरह की निकासियों के लिए न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर सिर्फ 12 महीने कर दी गई है।

पहले आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि पांच साल और शादी-विवाह के लिए निकासी की न्यूनतम सेवा अवधि सात साल थी। इसी तरह से ईपीएफओ खाते से धनराशि निकालने के लिए मौजूदा 13 प्रावधानों को खत्म कर तीन प्रावधानों को ही लागू करने का फैसला किया गया है। इससे निकासी प्रक्रिया और आसान हो जाएगी। इसके साथ ही अब ईपीएफओ सदस्यों को आवश्यक जरूरतें (बीमारी, शिक्षा, विवाह), आवास संबंधी जरूरतें और विशेष परिस्थिति दिखाकर खाते से पैसा निकाल सकेंगे। हालांकि, अंतिम दावा निपटान अवधि को बढ़ा दिया गया है। इसे दो महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है।


विशेष परिस्थिति के लिए कारण बताना जरूरी नहीं

विशेष परिस्थितियों के मामले में सदस्य को कारण बताने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले कारण बताना जरूरी होता था, जिससे कई दावे खारिज हो जाते थे। अब कर्मचारी बिना कोई कारण बताए भी आवेदन कर सकता है।


निकासी की सीमा बढ़ाई गई

  • अब शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार निकासी की अनुमति होगी।

  • पहले शादी और शिक्षा दोनों मिलाकर अधिकतम 3 बार तक निकासी की अनुमति थी।

  • अब किसी भी आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि सिर्फ 12 महीने रखी गई है।


घर से जमा कर पाएंगे जीवन प्रमाण पत्र

ईपीएफओ ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के साथ समझौता ज्ञापन को मजूरी दी। इसके बाद पेंशनभोगी अपना डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र घर बैठे जमा कर सकेंगे। प्रति सर्टिफिकेट 50 रुपये खर्च होंगे, जिसे पूरी तरह ईपीएफओ वहन करेगा। यह सुविधा ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बुजुर्ग पेंशनरों के लिए राहत साबित होगी।


'विश्वास योजना' में भी राहत दी गई

  • अभी नियोक्ताओं द्वारा पीएफ की रकम देरी से जमा करने पर जुर्माने की दर 5% से 25% प्रति वर्ष थी, इसे घटाकर सिर्फ एक फीसदी प्रतिमाह किया गया।

  • दो महीने की देरी पर 0.25 और चार महीने की देरी पर 0.50 फीसदी जुर्माना लगेगा।

  • यह योजना छह महीने तक लागू रहेगी, जिसे आगे छह महीने और बढ़ाया जा सकता है। इस योजना से नियोक्ताओं और ईपीएफओ सदस्यों, दोनों को फायदा होगा।

  • नियोक्ताओं को विवादों से राहत मिलेगी और कर्मचारियों को उनका पैसा जल्दी और आसानी से मिलेगा।

  • इससे 6000 से अधिक मामलों का निपटारा होगा और 2,400 करोड़ से अधिक के बकाया विवाद समाप्त होंगे।


अन्‍य अहम निर्णय 

  • अब यह सभी निकासी बिना किसी दस्तावेजी प्रक्रिया के 100 फीसदी ऑटो दावा निपटान से होंगी।

  • अंतिम दावा निपटान के लिए अवधि को 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने किया गया।

  • अंतिम पेंशन निकासी की अवधि दो महीने से बढ़ाकर 36 महीने की गई।

  • अब फाइलें ऑनलाइन और तेजी से निपटाई जाएंगी। इससे उच्च पेंशन, विशेष सत्यापन और अन्य सुधार जैसे मामलों की गति बढ़ेगी।


13 तरह के प्रावधानों को खत्‍म किया गया, जो पीएफ निकासी पर लागू होते थे।

मंत्रालय ने सोमवार को 'कर्मचारी नामांकन अभियान, 2025' (ईईसी 2025) की शुरुआत की। इसके तहत पीएफ खाते से वंचित निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का पंजीकरण किया जाएगा। यह योजना एक नवंबर, 2025 से 30 अप्रैल, 2026 तक लागू रहेगी। योजना के अनुसार, नियोक्ता उन सभी मौजूद्रा कर्मचारियों का नामांकन कर सकते हैं, जो एक जुलाई 2017 और 31 अक्टूबर, 2025 के बीच प्रतिष्ठान में शामिल हुए है लेकिन किसी वजह से पहले ईपीएफ योजना में नामांकित नहीं थे।


ईपीएफ रिटर्न भरने की ने समयसीमा बढ़ी

ईपीएफओ ने सितंबर माह के लिए ईपीएफ रिटर्न या ईसीआर दाखिल करने की समयसीमा एक सप्ताह बढ़ाकर 22 अक्टूबर, 2025 तक कर दी है। श्रम मंत्रालय के एक बयान में कहा कि नियोक्ताओं को हर महीने की 15 तारीख तक ईसीआर दाखिल करना अनिवार्य है।